
भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और इसके साथ ट्रेडिंग के नए आयाम खुल रहे हैं। फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (एफएंडओ) में एक्सपायरी एक ऐसा तत्व है जो हर ट्रेडर की जुबान पर रहता है। वीकली एक्सपायरी या मंथली एक्सपायरी—इनका क्या अर्थ है और ये निवेश रणनीति को कैसे प्रभावित करती हैं?
ये कॉन्ट्रैक्ट्स समय-सीमित होते हैं। एक्सपायरी की तारीख पर ये समाप्त हो जाते हैं। मान लीजिए, आपने निफ्टी का ऑप्शन लिया जिसकी समाप्ति मंगलवार को है। उस दिन पहले पोजीशन बंद करें या सेटलमेंट हो जाएगा।
पहले केवल मासिक एक्सपायरी थी, महीने के आखिरी गुरुवार को। इससे लंबी अवधि की योजना बनाने का मौका मिलता। 2016 में एनएसई ने बैंक निफ्टी के लिए साप्ताहिक शुरू किए, फिर निफ्टी तक विस्तार। अब सभी की एक्सपायरी मंगलवार को निर्धारित है—एनएसई का बड़ा सुधार।
अंतर साफ है: वीकली में कम समय, ज्यादा उतार-चढ़ाव—शॉर्ट ट्रेडर्स के लिए आदर्श। मंथली स्थिर, लॉन्ग टर्म के लिए बेहतर। निफ्टी जैसे इंडेक्स में भरपूर लिक्विडिटी।
एक्सपायरी दिवस पर बाजार में भारी हलचल होती है। संस्थागत निवेशक हेजिंग के लिए इस्तेमाल करते हैं। रिटेल ट्रेडर्स के लिए सलाह: जोखिम समझें, अभ्यास करें।
बिना ज्ञान के ट्रेडिंग घातक। सीखें, समझें और सफल हों।