
नई दिल्ली। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका ने सोना, डॉलर और येन जैसी सुरक्षित संपत्तियों में तेजी लाने का अनुमान जताया है। डीबीएस बैंक की बुधवार जारी रिपोर्ट में इस खतरे को रेखांकित किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख करेंगे, जिससे सॉवरेन और कॉरपोरेट बॉन्ड्स के स्प्रेड बढ़ सकते हैं। अल्पकालिक मौद्रिक नीतियां यथावत रहेंगी।
बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री तैमूर बेग ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की माइनों की क्षमता पर चिंता जताई। भले ही नौसेना के युद्धपोतों से सीधा खतरा कम हो, लेकिन यह शिपमेंट को रोक सकता है और बीमा, शिपिंग व ऊर्जा लागतों को आसमान छूने पर मजबूर कर सकता है।
बेग ने कहा कि उत्तर के कुर्द और दक्षिण के बलूच विद्रोह शासन परिवर्तन के युद्धों को जन्म दे सकते हैं, जो संघर्ष समाप्ति की शर्तों से मेल खाएंगे। इससे तुर्की से इराक तक कई देश प्रभावित हो सकते हैं।
होर्मुज के लंबे अवरोध से खाड़ी तेल निर्यात ठप हो जाएगा, क्योंकि अधिकांश कच्चा तेल इसी रास्ते से जाता है। पूर्ण संकट में अमेरिकी रणनीतिक भंडार भी अपर्याप्त साबित होंगे।
बैंक का अनुमान है कि चरम स्थिति में तेल 100-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी, फेड की दर कटौती सीमित होगी और वैश्विक मंदी का डर मंडराएगा।
रिपोर्ट में चांदी को सोने का विकल्प मानने से इनकार किया गया है, क्योंकि इसकी 60 प्रतिशत मांग औद्योगिक होती है और बाजार छोटा है। मध्य पूर्व की अस्थिरता से सुरक्षित एसेट्स चमकेंगे।