
इजरायल, अमेरिका और ईरान के बीच तेज होती जंग ने खाड़ी क्षेत्र को पूरी तरह अशांत कर दिया है। इससे इस इलाके से आने वाले कच्चे तेल की आपूर्ति पर गहरा संकट मंडरा रहा है। विशेषज्ञों ने रविवार को चेतावनी दी कि गैर-खाड़ी स्रोत इस कमी को पूरा नहीं कर पाएंगे, जिससे सोमवार को बाजार खुलते ही तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आ सकता है।
व्यापारियों का मानना है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो निश्चित रूप से कीमतें आसमान छू लेंगी। होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों का आवागमन अब तक बाधित नहीं हुआ है, लेकिन टैंकरों पर हमले या फंसने का डर प्रमुख तेल कंपनियों को इस रास्ते से माल ढोना बंद करने पर मजबूर कर रहा है। ईरान और ओमान के बीच स्थित यह संकरी जलसीमा प्रतिदिन करीब 20 मिलियन बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आवाजाही संभालती है।
टैंकरों की भाड़ा दरें पहले ही चढ़ चुकी हैं। मध्य पूर्व से चीन जाने वाले विशालकाय तेल टैंकरों के लिए दरें इस साल तीन गुना बढ़ गई हैं, जो जहाज मालिकों की सतर्कता को दर्शाता है।
खाड़ी देश दुनिया के 20 प्रतिशत कच्चे तेल का उत्पादन करते हैं। आपूर्ति में कमी का आकार इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सीधे हमले होते हैं या नहीं और समुद्री रास्ते कब सामान्य होते हैं। अभी तक ईरान और इजरायल-अमेरिकी गठबंधन के संघर्ष में किसी बड़े तेल-गैस प्लांट को नुकसान की पुष्टि नहीं हुई। हालांकि यूएई, बहरीन, कतर व कुवैत में धमाकों की खबरें आईं और ईरान के खारग द्वीप के आसपास गोलीबारी की आवाजें सुनाई दीं, जो तेहरान के अधिकांश तेल निर्यात का केंद्र है।
विश्लेषक 1980 के ईरान-इराक युद्ध के उदाहरण देते हुए कहते हैं कि छोटे-मोटे टकराव भी कीमतों व सप्लाई पर गहरा असर डालते हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर्प्स ने अमेरिकी व इजरायली सैन्य ठिकानों पर नई हमले की लहर की घोषणा की है। ये ईरान पर हालिया हमलों का बदला हैं, जिसमें कथित रूप से सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई।
ईरान सरकार ने बयान जारी कर कहा, ‘इस क्रूर कृत्य का कड़ा जवाब दिया जाएगा और यह इस्लामी इतिहास में नया अध्याय रचेगा।’ वैश्विक बाजार इस संकट पर नजर रखे हुए हैं, क्योंकि लंबे संघर्ष से ऊर्जा संकट गहरा सकता है।