
भोपाल। मध्य प्रदेश के पारंपरिक हस्तशिल्प और कृषि उत्पाद अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहे हैं। राज्य के 27 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है, जो उनकी भौगोलिक उत्पत्ति को प्रमाणित करता है।
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह टैग उत्पादों की मौलिकता सुनिश्चित करता है। 2004 में दार्जिलिंग चाय को भारत का पहला जीआई टैग मिला था, उसी परंपरा में मध्य प्रदेश आगे बढ़ रहा है।
बैतूल जिले के टिगोरिया क्राफ्ट विलेज की भरेवा कला को विशेष सम्मान प्राप्त हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिसंबर 2023 में कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से नवाजा। छतरपुर के खजुराहो स्टोन क्राफ्ट, काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प व पेपर मशी कला भी इस सूची में शुमार हैं।
चंदेरी व महेश्वरी साड़ियां, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के चमड़े के खिलौने, दतिया-टीकमगढ़ के घंटी धातु के बर्तन, उज्जैन का बटीक, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी हैंडलूम साड़ी जैसी कलाएं जीआई टैग की हकदार बनीं।
कृषि उत्पादों में ग्वालियर की ज्यामितीय कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी लोहा शिल्प, बालाघाट चिन्नौर चावल, रीवा सुंदरजा आम, सीहोर-विदिशा शरबती गेहूं, महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा-पांढुर्णा नागपुरी संतरा, झाबुआ कड़कनाथ, रतलाम सेव, मुरैना गजक, बुंदेलखंड कठिया गेहूं, जावरा लहसुन शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, और भी उत्पादों की जीआई टैग प्रक्रिया चल रही है। यह उपलब्धि स्थानीय कारीगरों व किसानों के लिए वरदान साबित होगी।