
गांधीनगर की अदालत ने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) के आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को दोषी ठहराया है। अदालत ने उन्हें एक वर्ष की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई, जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन को रेखांकित करती है।
मामला एईएल की शिकायत पर आधारित था, जिसमें आरोप लगाया गया कि नायर ने एक्स प्लेटफॉर्म पर झूठे पोस्ट साझा कर कंपनी और अदाणी समूह की छवि खराब करने की कोशिश की। कंपनी का कहना था कि ये पोस्ट निष्पक्ष आलोचना नहीं, बल्कि जानबूझकर नुकसान पहुंचाने वाले थे।
मनसा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने लंबी सुनवाई के बाद एईएल के तर्कों को सही माना। अदालत ने फैसला दिया कि नायर के बयान मानहानिपूर्ण हैं और कानूनी कार्रवाई के योग्य। यह निर्णय मीडिया की जवाबदेही पर जोर देता है।
वरिष्ठ वकील ने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की आजादी देता है, लेकिन अनुच्छेद 21 के तहत प्रतिष्ठा का अधिकार सर्वोपरि है। सुब्रमण्यम स्वामी मामले (2016) में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मौलिक अधिकार घोषित किया।
हिंडनबर्ग रिसर्च से जुड़े मामलों में भी सुप्रीम कोर्ट ने जांच के आदेश दिए, जहां शॉर्ट सेलिंग की बात सामने आई। इससे झूठे आरोपों के बाजार पर प्रभाव स्पष्ट होता है। यह फैसला सोशल मीडिया पर जिम्मेदार पत्रकारिता की मिसाल बनेगा।