
भारत के कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर है। 2026 में औसत वेतन वृद्धि 9.1 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है, जो 2025 के 8.9 प्रतिशत से अधिक है। एक प्रमुख प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म की ताजा रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है, जो देशभर के हजारों संगठनों के आंकड़ों पर आधारित है।
सेक्टर के हिसाब से रियल एस्टेट व इंफ्रास्ट्रक्चर में सबसे ज्यादा 10.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि एनबीएफसी में 10.1 प्रतिशत। ये क्षेत्र विकास योजनाओं से गति पकड़ रहे हैं। दूसरी ओर, टेक्नोलॉजी, कंसल्टिंग व सर्विसेज में सबसे कम 6.6 प्रतिशत वृद्धि का पूर्वानुमान है।
ऑटोमोटिव, इंजीनियरिंग डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग व रिटेल में राष्ट्रीय औसत से बेहतर बढ़ोतरी संभव है। रिटेल कर्मियों को 9.5 प्रतिशत, लाइफ साइंसेज को 9.4 प्रतिशत, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स को 9.3 प्रतिशत व फंड्स मैनेजमेंट को 8.5 प्रतिशत लाभ मिलेगा।
14 सौ से ज्यादा संगठनों व 45 उद्योगों वाले इस सर्वे में पाया गया कि नियोक्ता टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग व ग्राहक-केंद्रित स्किल्स पर जोर दे रहे हैं। बदलते बाजार में विशेष प्रतिभाओं की होड़ तेज है।
कर्मचारी छोड़ने की दर 2025 में 16.2 प्रतिशत पर आ गई, जो 2024 के 17.7 व 2023 के 18.7 से कम है। लक्षित भर्ती, सहभागिता, करियर ग्रोथ व स्थिरता से रिटेंशन बेहतर हो रहा।
स्थिर कार्यबल के साथ कंपनियां स्किल डेवलपमेंट, भविष्य की क्षमताओं में निवेश व मजबूत टैलेंट पाइपलाइन बना सकती हैं। फर्म के एक्सपर्ट ने श्रम संहिताओं को महत्वपूर्ण बताया। वेतन मानकीकरण व सोशल सिक्योरिटी से कंपनियां पैकेज रिव्यू कर रही हैं। स्पष्ट कम्युनिकेशन जरूरी है।