
पाकिस्तान के योजना आयोग की ताजा रिपोर्ट ने देश में पिछले छह वर्षों के दौरान गरीबी और आर्थिक असमानता में तेजी से हुई वृद्धि का चौंकाने वाला खुलासा किया है। 2018-19 और 2024-25 के घरेलू एकीकृत आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित यह विश्लेषण घरेलू आय वितरण की तुलनात्मक पड़ताल करता है।
राष्ट्रीय स्तर पर गरीबी की दर 21.9 प्रतिशत से बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई। ग्रामीण इलाकों में यह 28.2 से 36.3 प्रतिशत तक पहुंची, जबकि शहरी क्षेत्रों में 11 से 17.4 प्रतिशत हुई। बेरोजगारी 5.7 से 7.1 प्रतिशत और परिवारों की वास्तविक आय में 27.5 प्रतिशत की कमी इसके प्रमुख कारण हैं।
कोविड-19 महामारी और 2022-23 की बाढ़ ने अर्थव्यवस्था को झकझोर दिया। आईएमएफ कार्यक्रमों के तहत सब्सिडी कटौती, अप्रत्यक्ष करों में इजाफा और विकास खर्च में कमी ने आम आदमी पर बोझ बढ़ाया।
रिपोर्ट पेश करते हुए योजना मंत्री ने निर्यात आधारित मॉडल, पिछड़े जिलों पर फोकस, वित्तीय संतुलन और सामाजिक सुरक्षा मजबूत करने की सिफारिश की, जिसमें नकद हस्तांतरण और एसएमई प्रोत्साहन शामिल हैं।
विशेषज्ञ इसे जीवन स्तर में गिरावट का संकेत मानते हैं। सरकार अगर सुझावों पर अमल करेगी तो आर्थिक स्थिरता और सामाजिक न्याय संभव है।