
नई दिल्ली। सेबी ने वैकल्पिक निवेश कोषों (एआईएफ) के लिए रिपोर्टिंग नियमों में बड़ा बदलाव किया है। यह कदम अनुपालन बोझ घटाने और कारोबार करने की आसानी बढ़ाने के मकसद से उठाया गया है। एआईएफ विनियमन 2012 के नियम 28 और मास्टर सर्कुलर के खंड 15.1 के तहत जारी सर्कुलर तत्काल लागू हो गया।
पहले एआईएफ को हर तिमाही समाप्ति के 15 दिन बाद आईवीसीए वेबसाइट के प्रारूप में विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट जमा करनी पड़ती थी। अब रिपोर्टिंग चक्र सरल हो गया। वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) के अंत में एक संपूर्ण वार्षिक गतिविधि रिपोर्ट देनी होगी। यह रिपोर्ट 31 मार्च के 30 दिनों के भीतर सेबी इंटरमीडियरी पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड होनी चाहिए। पहली रिपोर्ट मार्च 2026 वाले वर्ष के लिए 31 मई 2026 तक।
इसके साथ सीमित तिमाही गतिविधि रिपोर्ट भी जरूरी है, जो तिमाही अंत के 15 दिन बाद संशोधित प्रारूप में एसआईपी पर जमा होगी। पहली जून 2026 वाली तिमाही के लिए। मार्च तिमाही की अलग रिपोर्ट नहीं, क्योंकि वार्षिक में उसका डेटा शामिल होगा।
एआईएफ उद्योग के तेज परिवर्तनों को देखते हुए ये सुधार हुए। आईवीसीए के एआईएफ स्टैंडर्ड्स फोरम से सलाह और सेबी के ईज ऑफ डूइंग बिजनेस ग्रुप की सिफारिश पर फॉर्मेट बदले गए। नया प्रारूप सर्कुलर के तीन दिन बाद आईवीसीए साइट पर उपलब्ध होगा, जो एआईएफ की मदद करेगा।
यह 7 मई 2024 मास्टर सर्कुलर के खंड 15.1 को बदल देगा। निवेशक हित, बाजार विकास और नियमन मजबूती के लिए यह कदम है। सर्कुलर सेबी वेबसाइट के लीगल फ्रेमवर्क और एआईएफ सेक्शन में है।