
दुनिया भर में विरोध प्रदर्शनों का दौर चल रहा है, ऐसे में अफ्रीका के जंजीबार द्वीपों पर 1964 की क्रांति याद आती है। 12 जनवरी को जॉन ओकेलो के नेतृत्व में अफ्रीकी विद्रोहियों ने अरब शासित सुल्तान जमशिद बिन अब्दुल्लाह की सरकार को उखाड़ फेंका। सुल्तान को देश छोड़कर भागना पड़ा।
ये द्वीप कभी गुलामी के बड़े केंद्र थे। 1896 में ब्रिटिश नौसेना ने महज 38 मिनट के युद्ध में विद्रोह दबाया था। लेकिन 98 साल बाद इतिहास ने पलटा खाया। ओकेलो के समर्थकों ने पुलिस थानों और सरकारी भवनों पर कब्जा कर लिया।
शेख अबेइद आमानी करूमे को नया राष्ट्रपति बनाया गया। इससे 200 वर्ष पुरानी अरब सत्ता का अंत हो गया। क्रांति के दौरान अरबों और भारतीयों पर हिंसा हुई, लूटपाट और हत्याएं आम हो गईं। हजारों लोग मारे गए या भगा दिए गए।
कुछ महीनों बाद जंजीबार का तंगानायिका के साथ विलय हुआ, जिससे तंजानिया का जन्म हुआ। सुल्तान जमशिद ओमान में निर्वासित जीवन जीते हुए 30 दिसंबर 2024 को चल बसे। आज के प्रदर्शनों में ये घटना शक्ति परिवर्तन की याद दिलाती है।