
वॉशिंगटन। व्हाइट हाउस ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि भारत को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दौर के व्यापारिक समझौते के तहत किए गए टैरिफ कम करने के वचनों को पूरा करना होगा। इस सौदे को अमेरिकी किसानों, श्रमिकों और उद्योगपतियों के लिए बड़ी सफलता करार दिया गया है।
ट्रंप प्रशासन इसे व्यापार नीति का महत्वपूर्ण पड़ाव मानता है, लेकिन केवल वादों पर नहीं, बल्कि ठोस कदमों पर जोर दे रहा है। एक अधिकारी ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप ने सिद्ध कर दिया है कि हम हर व्यापारिक साथी से प्रतिबद्धताओं का पालन अपेक्षित रखते हैं।”
किन उत्पादों या क्षेत्रों में टैरिफ में बदलाव होगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई। अमेरिकी कृषि समूह भारत के ऊंचे कृषि शुल्कों को निर्यात में बाधा बताते रहे हैं। उद्योग संगठन नियामकीय मानकों और प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं को बाजार पहुंच में रुकावट करार देते हैं।
दक्षिण एशिया और इंडो-पैसिफिक में भारत को प्रमुख साझेदार बताया गया है। व्यापार, प्रौद्योगिकी सहयोग और सप्लाई चेन मजबूती इन संबंधों के आधार हैं। पिछले दस वर्षों में दोनों देशों के बीच वस्तुओं व सेवाओं का व्यापार तेजी से बढ़ा है।
टैरिफ विवादों के बावजूद बातचीत जारी रही है। अब सवाल यह है कि क्या भारत वचनों को अमल में लाएगा, जिससे अमेरिकी हितों को लाभ मिले।