
वाशिंगटन। अमेरिकी सांसदों और ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विदेशों में लोकतंत्र को मजबूत करना अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का अभिन्न अंग है। कैपिटल हिल पर आयोजित एक महत्वपूर्ण संसदीय सुनवाई में नेशनल एंडोमेंट फॉर डेमोक्रेसी (एनईडी) को अमेरिकी हितों की रक्षा करने वाले प्रमुख हथियार के रूप में प्रस्तुत किया गया।
राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश विभाग संबंधी उपसमिति की इस चर्चा में सांसदों ने विदेश नीति के व्यापक लक्ष्यों तथा सत्तावादी ताकतों से मुकाबले के संदर्भ में लोकतांत्रिक संस्थाओं के समर्थन की पड़ताल की। एनईडी के कार्यों को बार-बार राष्ट्रीय सुरक्षा का केंद्रीय स्तंभ बताया गया।
उपसमिति अध्यक्ष मारियो डियाज-बालार्ट ने कहा कि एनईडी प्रशासन की विदेश नीति को साकार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। नाइजीरिया, निकारागुआ और चीन जैसे देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा से लेकर ईरान, उत्तर कोरिया व क्यूबा में स्वतंत्रता संग्रामियों का साथ देना इसके दायरे में आता है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र व मानवाधिकार हमारी विदेश नीति व सुरक्षा का मूल तत्व हैं। एनईडी जैसे कार्यक्रम विरोधियों का सामना करने, अमेरिकी हितों को बढ़ावा देने और स्वतंत्रता के पक्ष में खड़े होने के लिए अनिवार्य हैं।
डियाज-बालार्ट ने याद दिलाया कि 1980 के दशक में सोवियत संघ के अत्याचारों से निपटने हेतु एनईडी की स्थापना हुई थी। सोवियत संघ भले न रहा, खतरे बने हुए हैं और उनका स्वरूप बदल चुका है।
वरिष्ठ सदस्य लोइस फ्रैंकल ने लोकतंत्र समर्थन को निवारक सुरक्षा उपाय बताया। यह दान नहीं, हमारी सुरक्षा के लिए सस्ता निवेश है। अस्थिरता युद्ध में बदल जाए तो होने वाले खर्च का यह एक छोटा हिस्सा मात्र है।
आलोचकों के तर्क को स्वीकारते हुए फ्रैंकल ने कहा कि एनईडी का कार्य स्वतंत्र, पारदर्शी और सार्वभौमिक सिद्धांतों पर आधारित है।
एनईडी के अध्यक्ष डेमन विल्सन ने सांसदों से कहा कि स्वतंत्रता के इच्छुकों का साथ देना अमेरिकी सुरक्षा व अर्थव्यवस्था में रणनीतिक पूंजीगत निवेश है। जहां लोकतांत्रिक संस्थाएं कमजोर पड़ती हैं, वहां संघर्ष, तस्करी, आतंकवाद और दमन फैलता है।
विल्सन ने यूक्रेन में रूसी आक्रामकता के विरुद्ध सहायता, चीन के 53 देशों में 100 से अधिक पुलिस स्टेशनों का खुलासा तथा बोलीविया के लिथियम भंडार को मॉस्को-बीजिंग के कब्जे से बचाने जैसे उदाहरण दिए। हर डॉलर का 84 सेंट सीधे कार्यक्षेत्र में जाता है, जो इसे सबसे किफायती निवेश बनाता है।
1983 में कांग्रेस द्वारा शीत युद्धकाल में स्थापित यह संस्था लोकतांत्रिक आंदोलनों को मजबूत करने का कार्य जारी रखे हुए है।