
वाशिंगटन। चीन के बढ़ते वैश्विक प्रभाव को कम करने के लिए अमेरिका भारत को महत्वपूर्ण साझेदार बना रहा है, खासकर दुर्लभ खनिजों और उन्नत प्रौद्योगिकी की आपूर्ति श्रृंखलाओं में। विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी जैकब हेलबर्ग ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के समक्ष आर्थिक सुरक्षा पर चर्चा में यह बात कही।
उन्होंने बताया कि भारत अब अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ गठबंधन का औपचारिक सदस्य बन गया है। यह पहल सहयोगी देशों के बीच आवश्यक खनिजों, सेमीकंडक्टरों और एआई की आपूर्ति को मजबूत करने पर केंद्रित है। हेलबर्ग ने इसे एआई युग की आर्थिक सुरक्षा साझेदारी करार दिया।
उनका मानना है कि आने वाले समय में एआई की औद्योगिक नींव पर काबिज देश ही वैश्विक नेतृत्व हासिल करेंगे। भारत की ताकत उसके मानव संसाधन और खनिज परिष्करण क्षमता में है, जो चीन को चुनौती दे सकती है। चीन 90 प्रतिशत वैश्विक परिष्करण संभालता है, जो बड़ी चुनौती है।
रणनीति में सहयोगी देशों में ब्राउनफील्ड परियोजनाओं से क्षमता बढ़ाना और भारत, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में निजी निवेश शामिल हैं। अमेरिका आर्थिक साझेदारी, निर्यात नियंत्रण और विविधीकरण से चीन की नीतियों का मुकाबला कर रहा है।
हेलबर्ग ने कहा, चीन अलगाव की मंशा जाहिर कर चुका है, क्या हम निर्भर रहने को तैयार हैं? टैरिफ पर मतभेद के बावजूद चीन के वर्चस्व पर चिंता साझा रही। 55 देशों की हालिया बैठक और भारत-अमेरिका व्यापार बयान उल्लेखनीय हैं।
अमेरिका-भारत संबंध मजबूत हो रहे हैं, इसकी दिशा पर पूर्ण विश्वास है। यह साझेदारी वैश्विक संतुलन बदलेगी।