
वाशिंगटन। अमेरिकी सीनेट में संघीय इमिग्रेशन कानूनों की कड़ाई और नागरिक स्वतंत्रताओं पर तीखी राजनीतिक जंग छिड़ गई है। यह विवाद अमेरिका में बसे या बसने की राह पर प्रवासी समुदायों, खासकर भारतीय वीजा धारकों और ग्रीन कार्ड आवेदकों के लिए चिंता का बड़ा कारण बन गया है।
होमलैंड सिक्योरिटी कमेटी ने मिनेसोटा के ‘ऑपरेशन मेट्रो सर्ज’ की गहन समीक्षा की, जो संघीय एजेंटों और प्रदर्शनकारियों के टकराव के बाद शुरू हुआ था। सुनवाई में दो अमेरिकी नागरिकों रेनी गुड और एलेक्स प्रीडी की मौत प्रमुख मुद्दा रही, जो एजेंटों के साथ अलग-अलग मुठभेड़ों में हुईं।
चेयरमैन रैंड पॉल ने जनता का विश्वास बहाल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर अधिकारियों की वीडियोग्राफी संवैधानिक अधिकार है और नेताओं को उत्तेजक बयानों से बचना चाहिए।
रैंकिंग मेंबर गैरी पीटर्स ने संघीय अफसरों पर हिंसक रवैये का आरोप लगाया, कहा कि पीड़ितों को गलत तरीके से उकसाने वाला बताया गया।
मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल कीथ एलिसन ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा इमिग्रेशन अभियान करार देते हुए तत्काल रोक की मांग की, लेकिन स्पष्ट किया कि राज्य कानूनी सहायता से इनकार नहीं कर रहा।
रिपब्लिकन टॉम एमर ने पलटवार किया कि राज्य नेताओं ने अपराधी अवैध प्रवासियों का सुरक्षित आश्रय बना दिया है।
आईसीई के टॉड लायंस ने एजेंटों पर लगातार हमलों का जिक्र किया, जबकि सीबीपी के रॉडनी स्कॉट ने वीडियो बनाने को अपराध नहीं बताया। दोनों ने गोलीबारी की जांच जारी रहने की बात कही।
मिनेसोटा-संघीय एजेंसियों के समन्वय पर चर्चा हुई, पॉल ने निर्वासन आदेशों पर बेहतर तालमेल का सुझाव दिया।
यह बहस अमेरिकी इमिग्रेशन नीतियों की गहरी खाई को उजागर करती है, जहां सुरक्षा और अधिकारों का टकराव प्रवासियों की चिंताओं को बढ़ा रहा है।