
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के तुरंत बाद अमेरिकी सेना ने दो रूसी झंडे वाले तेल टैंकरों पर कब्जा कर लिया है। यह घटना उत्तर अटलांटिक और कैरेबियन सागर में हुई, जिससे रूस-अमेरिका संबंधों में नया तनाव पैदा हो गया है।
पहला ऑपरेशन अटलांटिक महासागर में हुआ, जहां ब्रिटेन की मदद से अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने ‘मारिनेरा’ टैंकर पर चढ़ाई की। पहले बेला-1 के नाम से जाना जाने वाला यह जहाज हफ्तों से अमेरिका के निशाने पर था। ईरानी तेल की तस्करी के आरोप में 2024 में प्रतिबंधित यह टैंकर ‘डार्क फ्लीट’ का हिस्सा था।
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने खुद इस सहयोग की पुष्टि की, जबकि रूस ने टैंकर की सुरक्षा के लिए पनडुब्बी भेजी थी। यूरोपियन कमांड ने सोशल मीडिया पर बताया कि फेडरल कोर्ट के वारंट पर जहाज जब्त किया गया।
इधर, कैरेबियन सागर में दूसरा टैंकर एमटी सोफिया पकड़ा गया। साउदर्न कमांड ने इसे बिना किसी हादसे के अंजाम दिया, जो वेनेजुएला से जुड़े अवैध व्यापार का हिस्सा था।
ये कार्रवाइयां मादुरो शासन पर अतिरिक्त दबाव डाल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस की नाराजगी युद्ध की आशंका बढ़ा सकती है। वैश्विक ऊर्जा राजनीति में यह नया मोड़ महत्वपूर्ण है, क्योंकि ऐसे छाया बेड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को तोड़ने का जरिया बनते हैं।
जांच से और खुलासे हो सकते हैं, जो ईरान-वेनेजुएला गठजोड़ को बेनकाब करेंगे। दुनिया की नजरें अब रूस के अगले कदम पर टिकी हैं।