
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका को बड़ी सफलता हाथ लगी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की गाजा शांति योजना को सर्वसम्मति से समर्थन मिला। अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज ने इसे 13-0 के मत से पारित प्रस्ताव बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की एकजुटता का प्रतीक कहा।
सेलम न्यूज चैनल पर ह्यूग हेविट को दिए साक्षात्कार में वाल्ट्ज ने बताया कि यह इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर बड़ी कूटनीतिक उपलब्धि है। योजना के तहत गाजा में अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल तैनात होगा, फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक प्राधिकरण बनेगा और विश्व बैंक के अधीन विशेष कोष स्थापित किया जाएगा।
इंडोनेशिया ने 8,000 सैनिक देने और शांति बोर्ड की पहली बैठक से पहले 5 अरब डॉलर की घोषणा की है। बंधकों की रिहाई हो चुकी है, युद्धविराम कायम है और मानवीय सहायता पहुंच रही है। अब हमास पर केंद्रित दूसरा चरण शुरू होगा, जहां हथियार डालने का विकल्प आसान या कठोर होगा।
वाल्ट्ज ने कहा कि कतर, तुर्की और मिस्र जैसे पूर्व हमास समर्थक अब अमेरिका के साथ हैं। इजरायल भी इस प्रयास का हिस्सा है। ईरान के खिलाफ सख्ती बढ़ेगी। संयुक्त राष्ट्र के स्नैपबैक प्रतिबंध प्रभावी हैं, रूस-चीन की आपत्तियों के बावजूद।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड 40-50 प्रतिशत अर्थव्यवस्था पर काबिज है, प्रतिबंधों का असर साफ दिख रहा। घोस्ट फ्लीट पर जहाज जब्त करने का अधिकार अमेरिका को है। ईरान में अशांति में 18 मौतें हुईं, जो शासन के दमन को दर्शाती हैं। मसीह अलीनेजाद जैसी असंतुष्टों ने संयुक्त राष्ट्र में आवाज बुलंद की।
ईरान को यूरेनियम संवर्धन, बैलिस्टिक मिसाइलें और आतंकी समर्थन छोड़ना होगा। अमेरिका ने स्पष्ट समयसीमा दी है।