
वॉशिंगटन से आई बड़ी खबर में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से अमेरिका को अलग करने का ऐलान किया है। इनमें भारत की अगुआई वाला इंटरनेशनल सोलर अलायंस (आईएसए) भी शुमार है। यह कदम ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें वैश्विक संस्थाओं को अमेरिकी हितों के खिलाफ करार दिया गया है।
आईएसए ने 7 जनवरी 2026 के अमेरिकी मेमोरेंडम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संगठन ने सोलर ऊर्जा के प्रसार में उल्लेखनीय प्रगति की है। 125 सदस्य देशों में सहयोग बढ़ा है, खासकर एनर्जी स्टोरेज के क्षेत्र में। 95 से अधिक देशों में आईएसए के कार्यक्रम चल रहे हैं, जो नीतिगत ढांचे, बाजार निर्माण और राष्ट्रीय योजनाओं को मजबूत कर रहे हैं।
प्रदर्शन परियोजनाओं ने सोलर समाधानों की व्यवहार्यता साबित की है। आईएसए ने स्पष्ट किया, ‘हम सोलर अपनाने और ऊर्जा संक्रमण के लक्ष्यों पर काम जारी रखेंगे।’ व्हाइट हाउस का कहना है कि ये संगठन फिजूलखर्ची वाले और खराब प्रबंधित हैं।
विदेश सचिव मार्को रुबियो ने एक्स पर लिखा, ‘ट्रंप ने अमेरिका-विरोधी संगठनों से विदाई दी। ग्लोबल ब्यूरोक्रेसी को सब्सिडी खत्म।’ अमेरिकी बयान में जोर दिया गया कि संसाधन केवल उपयोगी सहयोग पर लगेंगे।
यह फैसला जलवायु प्रयासों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन आईएसए भारत के नेतृत्व में आगे बढ़ने को तैयार है। वैश्विक सौर क्रांति पर नजरें टिकी हैं।