
वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक मतभेदों को दरकिनार करते हुए अमेरिकी कांग्रेस सदस्यों ने दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी की मजबूती पर जोर दिया है। सीएसआईएस के एक कार्यक्रम में बोलते हुए प्रतिनिधि अमी बेरा ने कहा कि शुल्क, वीजा और बाजार पहुंच जैसे मुद्दे भले ही समय-समय पर तनाव पैदा करते हैं, लेकिन ये रिश्तों की बड़ी तस्वीर को प्रभावित नहीं करते।
उन्होंने अपनी भारत यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि एच-1बी वीजा और ऊंचे शुल्कों ने चर्चाओं को कठिन बनाया था, फिर भी दोनों पक्ष आगे की राह समझते हैं। अमेरिकी कंपनियां भारत को निवेश का सर्वोत्तम ठिकाना मानती हैं और अरबों डॉलर लगा रही हैं।
दूसरे प्रतिनिधि रिच मैककॉर्मिक ने आर्थिक मतभेदों को व्यापक नजरिए से देखने की सलाह दी। उन्होंने दंडात्मक शुल्कों का विरोध किया और मुक्त व्यापार को समाज के लिए फायदेमंद बताया। कृषि क्षेत्र पर चर्चा में उन्होंने भारत की आत्मनिर्भरता की सराहना की।
भारत की बढ़ती आबादी और चंद्रमा मिशन जैसी तकनीकी सफलताओं का उल्लेख करते हुए मैककॉर्मिक ने कहा कि भारत विकास की अनोखी गति पर है। बेरा ने कृषि नीतियों की जटिलताओं पर प्रकाश डाला। ऊर्जा के मोर्चे पर रूसी तेल खरीद को आर्थिक बुद्धिमत्ता बताया।
कुल मिलाकर, दोनों ने लंबी अवधि की साझेदारी पर भरोसा जताया, जो तात्कालिक विवादों से ऊपर है।