
वाशिंगटन। अमेरिकी कांग्रेस के दो प्रमुख डेमोक्रेट सांसदों ने मेटा और गूगल पर जमकर निशाना साधा है। हाउस ज्यूडिशियरी कमेटी की उपाध्यक्ष बेका बैलिंट और इमिग्रेशन उपसमिति की चेयरपर्सन प्रमिला जयपाल ने दोनों कंपनियों के सीईओ को पत्र लिखकर गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) और आईसीई के विवादास्पद विज्ञापनों को तत्काल हटाने की मांग की है। इन विज्ञापनों में श्वेत राष्ट्रवादी विचारधारा की गंध साफ झलकती है।
सांसदों का आरोप है कि आईसीई इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल बड़े स्तर पर भर्ती के लिए कर रही है। मिनियापोलिस, शिकागो, पोर्टलैंड और न्यू ऑरलियन्स जैसे शहरों में हजारों नए अधिकारी तैनात करने की योजना है। इसके लिए भर्ती मानदंडों में ढील दी गई—उम्र सीमा खत्म, 50,000 डॉलर का साइनिंग बोनस और बिना पर्याप्त ट्रेनिंग के मैदान में उतारना।
फेसबुक-इंस्टाग्राम पर स्पेनिश भाषा, मैक्सिकन फूड या लैटिन संगीत पसंद करने वालों को ‘हमारा घर फिर से हमारा होगा’ जैसे नारे दिखाए जा रहे हैं, जो कट्टरपंथी और नव-नाजी गुटों का प्रतीक हैं। पिछले 90 दिनों में डीएचएस ने स्व-निर्वासन वाले विज्ञापनों पर 10 लाख डॉलर से ज्यादा उड़ाए, जबकि गूगल-यूट्यूब पर स्पेनिश विज्ञापनों पर 30 लाख डॉलर। पिछले साल कुल 58 लाख डॉलर का खर्च।
सांसदों ने सवाल उठाया कि नफरत भरी नीतियों के बावजूद ये विज्ञापन कैसे चले? डीएचएस के साथ अनुबंधों का दायरा बताएं और साझेदारी तुरंत समाप्त करें। यह मामला टेक कंपनियों की जिम्मेदारी और सरकारी विज्ञापनों की नैतिकता पर सवाल खड़ा करता है।
जैसे-जैसे आईसीई का विस्तार हो रहा है, इस विवाद से प्लेटफॉर्म्स पर निगरानी बढ़ सकती है। सांसदों की यह कार्रवाई इमिग्रेशन नीतियों में बदलाव की मांग को बल दे रही है।