
वॉशिंगटन। अमेरिका ने भारत को दक्षिण एशिया और पश्चिमी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का प्रमुख स्तंभ करार दिया है। दक्षिण और मध्य एशिया के सहायक विदेश सचिव पॉल कपूर ने हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी की उपसमिति के समक्ष लिखित बयान में ट्रंप प्रशासन की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत भारत संग गहन व्यापारिक समझौते, रक्षा साझेदारी और क्षेत्रीय निवेश बढ़ाने का वादा किया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति अमेरिका को सर्वोपरि रखने पर जोर देती है, जो वैश्विक महत्वपूर्ण क्षेत्रों से सक्रिय जुड़ाव द्वारा संभव है। कपूर ने कहा कि राष्ट्रपति के नेतृत्व में आर्थिक व सुरक्षा लाभ दोनों पक्षों को मिले हैं।
दक्षिण एशिया की महत्ता पर जोर देते हुए कपूर ने कहा कि भारत में अकेले 10 लाख से अधिक आबादी निवास करती है और यह उपमहाद्वीप को प्रभावित करता है। किसी शत्रु शक्ति का वर्चस्व वैश्विक अर्थव्यवस्था को झकझोर सकता है, इसलिए अमेरिका को क्षेत्र को स्वतंत्र व खुला बनाए रखना होगा।
भारत का आकार, भौगोलिक स्थिति और खुले क्षेत्र की प्रतिबद्धता इसे दक्षिण एशिया व व्यापक इंडो-पैसिफिक का आधार बनाती है। द्विपक्षीय सहयोग तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें उच्च स्तरीय कूटनीति, रक्षा, प्रौद्योगिकी व ऊर्जा क्षेत्र शामिल हैं।
कपूर ने 10 वर्षीय अमेरिका-भारत रक्षा ढांचा समझौते, ट्रस्ट पहल और ड्रोन से एलएनजी तक अमेरिकी उत्पादों की खरीद का उल्लेख किया। ट्रंप-मोदी ऐतिहासिक व्यापार सौदे के साथ ही बांग्लादेश संग समझौता हुआ, जो अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा देगा।
रणनीतिक क्षमता निर्माण के तीन दृष्टिकोण—रक्षा सहयोग, लक्षित निवेश व कूटनीति—पर बल दिया। पाकिस्तान को महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए ऊर्जा व कृषि व्यापार वृद्धि का जिक्र किया। बांग्लादेश, नेपाल, मालदीव, श्रीलंका व भूटान रणनीतिक हैं किंतु दबाव का शिकार हो सकते हैं।
ऋण जाल कूटनीति के खतरे सतर्क किया तथा साझा प्रयासों से साझेदारों को आत्मनिर्भर बनाने, अमेरिका को सुरक्षित व समृद्ध बनाने का आह्वान किया। चीन के बढ़ते प्रभाव के मुकाबले दक्षिण एशिया अमेरिकी इंडो-पैसिफिक रणनीति का केंद्र है, जहां भारत प्रमुख भूमिका निभा रहा।