
वाशिंगटन। अमेरिका के वरिष्ठ संवैधानिक विशेषज्ञ माइकल ओ’नील ने वेनेजुएला के निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी को पूर्णतः कानूनी बताया है। उनके अनुसार, अमेरिकी संविधान और कानूनों के अनुरूप यह कार्रवाई किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष की नहीं, बल्कि एक भगोड़े अपराधी की गिरफ्तारी है।
ओ’नील ने स्पष्ट किया कि अमेरिका लंबे समय से मादुरो को वेनेजुएला का वैध नेता नहीं मानता। उन्हें कार्टेल डे लॉस सोल्स नामक नार्को-टेररिस्ट संगठन का सरगना समझा जाता है, जो ड्रग तस्करी और आतंक से जुड़े अपराधों में लिप्त है। 2020 से फेडरल अभियोजकों ने उन पर आरोप लगाए हैं और अब न्यूयॉर्क में मुकदमा चलेगा।
ट्रंप और बाइडेन दोनों प्रशासनों ने उनकी मान्यता नहीं दी। बाइडेन ने तो 25 मिलियन डॉलर का इनाम भी रखा। संविधान के आर्टिकल II के तहत राष्ट्रपति को कानून लागू करने का अधिकार है। ग्रैंड जूरी के आरोप के बाद गिरफ्तारी अनिवार्य हो जाती है।
संप्रभु प्रतिरक्षा के दावे कमजोर हैं, क्योंकि वैधता का अभाव है। अदालतें सरकार के विदेश नीति फैसलों का सम्मान करती हैं। 1989 के नोरिएगा मामले जैसा उदाहरण मौजूद है। सैन्य सहायता जोखिमपूर्ण ऑपरेशन में जायज है।
मादुरो को पूरा कानूनी हक मिलेगा—वकील, सबूत, ट्रायल। दोषी पाए जाने पर लंबी सजा संभव। यह आपराधिक न्याय का मामला है, जिसमें अमेरिकी पक्ष मजबूत है।