
वॉशिंगटन। अमेरिका ने पारंपरिक बहुपक्षवाद के दौर को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया है। ट्रंप प्रशासन द्वारा 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों से बाहर निकलने का ऐलान करते हुए विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि ये संगठन फिजूलखर्ची, अक्षम और अमेरिकी हितों के खिलाफ हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ज्ञापन के कुछ दिन बाद यह फैसला औपचारिक हो गया।
रूबियो ने अपने सबस्टैक पोस्ट में अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया। सैकड़ों अपारदर्शी संगठनों से भरी यह प्रणाली जिम्मेदारियों के टकराव, दोहरे काम, कमजोर नतीजों और खराब प्रशासन से जूझ रही है। ‘अंतरराष्ट्रीय नौकरशाहों को बिना सवाल चेक देने का जमाना खत्म,’ उन्होंने लिखा।
प्रशासन के मुताबिक, इन संगठनों की गहन समीक्षा हुई, जिसमें उनके लक्ष्य, कार्यक्षमता और अमेरिकी संप्रभुता को परखा गया। कई अनावश्यक, फिजूलखर्च या अमेरिका-विरोधी ताकतों के प्रभाव में पाए गए।
रूबियो ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी करदाताओं का पैसा ऐसे संस्थानों में व्यय स्वीकार्य नहीं, जो नतीजे नहीं देते। ये ऊर्जा, विकास और संप्रभुता जैसे क्षेत्रों में असफल साबित हुए हैं। अमेरिका की मौजूदगी इन्हें ही वैधता देती है।
संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों पर विशेष निशाना। यूएन पॉपुलेशन फंड पर जबरन गर्भपात के वित्तपोषण का आरोप। यूएन वीमेन महिला परिभाषा तक स्पष्ट नहीं। जलवायु सम्मेलन ने विवादित क्षेत्रों में लाखों उड़ाए। अफ्रीकी मंच पर नस्लवादी मांगें।
‘ये संगठन विफलताओं से भरे हैं, अगर दुर्भावना न हो तो,’ रूबियो बोले। अमेरिकी जनता और विश्व को बेहतर नेतृत्व का हक है। यह कदम अमेरिकी कूटनीति को नई दिशा देगा।