
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी दूतावास ने जॉर्डन और यरूशलेम की यात्रा न करने की सलाह जारी की है। सुरक्षा चिंताओं के कारण अमेरिकी नागरिकों को इन इलाकों में जाने से पहले गहराई से सोचने की हिदायत दी गई है। स्थानीय खबरों पर नजर रखने और स्वतंत्र आपातकालीन योजनाएं बनाने पर जोर दिया गया।
जॉर्डन में 2 मार्च को गैर-आपातकालीन अमेरिकी अधिकारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया गया। दूतावास ने अपनी एडवाइजरी को अपडेट कर आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष के खतरों को रेखांकित किया। अमेरिका-ईरान के बीच 28 फरवरी से शुरू हुई दुश्मनी ने ड्रोन, मिसाइल हमलों और उड़ानों में बाधाओं का डर पैदा कर दिया है।
यात्रियों को सलाह है कि यदि फिर भी जाएं तो सरकारी सहायता पर निर्भर न रहें। संकट प्रबंधन और निकासी संबंधी जानकारियां देखें तथा आसपास की सतर्कता बरतें।
यरूशलेम के लिए दूतावास ने स्पष्ट किया कि इजरायल से अमेरिकियों को निकालने या प्रत्यक्ष मदद की स्थिति नहीं है। हालांकि, इजरायली पर्यटन मंत्रालय ने 2 मार्च से तबा बॉर्डर पर शटल सेवा शुरू की है। इसमें शामिल होने के लिए मंत्रालय के निकासी फॉर्म पर पंजीकरण जरूरी।
दूतावास इस शटल की सिफारिश नहीं करता। इसका इस्तेमाल करने वाले अपनी सुरक्षा खुद जिम्मेदार होंगे। यह सूचना इजरायल छोड़ने वालों के लिए सौजन्य में दी गई है।
फॉक्स न्यूज को दिए साक्षात्कार में उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप को ईरान के साथ लंबी बातचीत के बावजूद समय समाप्त होता नजर आ रहा है। गर्मियों में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत यूरेनियम संवर्धन इकाइयों को ध्वस्त किया गया।
ट्रंप का लक्ष्य केवल अस्थायी रोकथाम नहीं, बल्कि ईरान को कभी परमाणु हथियार न बनाने देना है। वैंस ने विदेश मंत्री रुबियो की सख्ती वाली टिप्पणी पर अमेरिकी सेना की श्रेष्ठ क्षमता का जिक्र किया। ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गहरा नुकसान पहुंचाने और मिसाइल खतरे समाप्त करने की ताकत मौजूद है। राष्ट्रपति के पास कई विकल्प हैं।
ये एडवाइजरी मिडिल ईस्ट की अस्थिरता को दर्शाती हैं, जहां अमेरिका अपनी सुरक्षा रणनीति को मजबूत कर रहा है।