
वॉशिंगटन में फरवरी में एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुनवाई होने वाली है, जिसमें भारत के चीन और अमेरिका के साथ रिश्तों की पड़ताल होगी। अमेरिका-चीन आर्थिक एवं सुरक्षा समीक्षा आयोग ने 17 फरवरी को होने वाली इस सुनवाई की घोषणा की है। इसका केंद्र बिंदु इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन है।
सुनवाई में सीमा विवादों से उपजे तनाव, हिंद महासागर में भारत की समुद्री उपस्थिति और एक प्रमुख क्षेत्रीय शक्ति के रूप में उसकी भूमिका पर चर्चा होगी। ये मुद्दे न केवल भूराजनीतिक महत्व के हैं, बल्कि वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा से जुड़े हैं।
आर्थिक पक्ष भी अहम रहेगा। भारत-चीन के बीच व्यापार, निवेश और भारत की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर तथा फार्मास्यूटिकल्स जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रयासों का विश्लेषण होगा। ये क्षेत्र वैश्विक प्रतिस्पर्धा के केंद्र में हैं।
अमेरिका की भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने की नीतियों की भी समीक्षा होगी। रक्षा सहयोग, तकनीकी साझेदारी और सप्लाई चेन विविधीकरण जैसे कदम राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए कितने प्रभावी हैं, यह जांचा जाएगा।
कमिश्नर हैल ब्रांड्स और जोनाथन एन स्टिवर्स की अध्यक्षता में होने वाली यह सुनवाई भारत को अमेरिका के लिए महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में स्थापित करती है। इंडो-पैसिफिक में स्थिरता के लिए भारत की क्षमताओं को आवश्यक माना जा रहा है।
यह आयोजन दर्शाता है कि अमेरिकी संसद भारत के भविष्य के फैसलों पर नजर रखे हुए है। आने वाले वर्षों में ये संबंध क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को कैसे प्रभावित करेंगे, इसका आकलन महत्वपूर्ण साबित होगा।