
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान पर चलाई जा रही सैन्य कार्रवाई को लेकर बुधवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन्स के बीच तीखा विवाद छिड़ गया। डेमोक्रेट्स ने इसे कांग्रेस की मंजूरी के बिना अवैध युद्ध करार देते हुए युद्ध शक्ति प्रस्ताव पारित करने की मांग की, जबकि रिपब्लिकन्स ने इसका बचाव किया और गृह सुरक्षा विभाग के फंडिंग विवाद पर निशाना साधा।
साप्ताहिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डेमोक्रेट नेताओं ने ट्रंप पर लापरवाही का आरोप लगाया। सदस्य पीट अगुलार ने कहा कि ट्रंप ने अमेरिकी जनता से वादा तोड़ा है। ईरान के साथ यह लापरवाह जंग पहले ही छह सैनिकों की जान ले चुकी है। उन्होंने मध्य पूर्व में और कार्रवाई रोकने के लिए प्रस्ताव का समर्थन किया।
टेड लियू ने जोर देकर कहा कि युद्ध घोषणा का अधिकार सिर्फ कांग्रेस को है। उन्होंने ऑपरेशन के जोखिमों पर सवाल उठाए, खासकर 11 अमेरिकी ठिकानों पर ईरान के हमलों के बाद। हकीम जेफ्रीज ने ट्रंप पर सबूतहीन युद्ध में धकेलने का इल्जाम लगाया और सफाई में बदलाव पर तंज कसा।
जेसन क्रो ने इसे ट्रंप का चुना हुआ युद्ध बताया, जबकि क्रिसी होलाहन ने मानवीय क्षति पर चेताया- युद्ध कोई रियलिटी शो नहीं, इसमें अमेरिकी खून और धन की कीमत चुकानी पड़ती है।
रिपब्लिकन्स ने पलटवार किया। लिसा मैक्लेन ने डेमोक्रेट्स पर डीएचएस को कमजोर करने का आरोप लगाया, जिसमें बाइडेन युग में 700 ईरानियों को सीमा पार करने पर छोड़ दिया गया। ब्रायन मास्ट ने ट्रंप के संवैधानिक अधिकारों का हवाला दिया। टॉम एमर ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को साहसिक कदम कहा।
स्टीव स्केलिस और स्पीकर माइक जॉनसन ने ईरान के लंबे खतरे पर जोर दिया और डेमोक्रेट्स के फंड रोकने की आलोचना की। संविधान और 1973 के युद्ध शक्ति कानून के तहत राष्ट्रपति को सूचना देनी होती है, बिना मंजूरी अभियान सीमित रहता है।
9/11 के बाद बने डीएचएस की फंडिंग पर विदेशी संघर्षों के दौरान बहस आम है। यह टकराव अमेरिकी लोकतंत्र में सत्ता संतुलन की परीक्षा है।