
वाशिंगटन। अमेरिकी कैबिनेट के वरिष्ठ अधिकारियों ने भारत के साथ हालिया व्यापार समझौते का जमकर स्वागत किया है। कृषि मंत्री ब्रुक रोलिंस और ऊर्जा मंत्री डग बर्गम का मानना है कि यह सौदा अमेरिकी किसानों, ऊर्जा क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था के लिए वरदान साबित होगा।
रोलिंस ने कृषि निर्यात पर जोर देते हुए कहा कि भारत जैसे विशाल और उभरते बाजार में अमेरिकी कृषि उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ेगी। 2024 में भारत के साथ कृषि व्यापार घाटा 1.3 अरब डॉलर रहा, लेकिन यह समझौता इसे पाटने में बड़ी भूमिका निभाएगा। किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और ग्रामीण इलाकों में धन का प्रवाह बढ़ेगा। उन्होंने इसे ‘अमेरिका फर्स्ट’ की सच्ची जीत करार दिया।
बर्गम ने ऊर्जा क्षेत्र के फायदों को रेखांकित किया। राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि ऊर्जा कूटनीति के इस प्रयास से अमेरिकी ऊर्जा बिक्री में इजाफा होगा और वैश्विक संबंध मजबूत होंगे।
यह समझौता ट्रंप और मोदी के फोन वार्ता के बाद हुआ, जिसमें भारतीय वस्तुओं पर अमेरिकी शुल्क 18 प्रतिशत घटा और अमेरिकी उत्पादों के लिए भारत में बाधाएं कम हुईं। भारत रूसी तेल आयात घटाकर अमेरिकी ऊर्जा, तकनीक व कृषि खरीद बढ़ाएगा। ट्रंप ने इसे दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत करने वाला कदम बताया, जो यूक्रेन युद्ध समाप्ति के प्रयासों का भी समर्थन करता है।
पूर्व राजनयिक इवान फीगेनबाम ने सतर्क प्रतिक्रिया दी। उन्होंने माना कि अतीत की अस्थिरता के बाद यह स्थिरता लाता है, लेकिन 500 अरब डॉलर की खरीद क्षमता पर सवाल उठाए। हालिया तनाव से उपजी अविश्वास को बहाल करने में समय लगेगा।
लंबे समय से शुल्क और ऊर्जा नीतियों पर विवादों के बीच यह समझौता संबंधों को नई दिशा देगा। व्यापार, ऊर्जा व रणनीतिक सहयोग को गति मिलेगी।