वॉशिंगटन में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। सांसदों ने वैश्विक प्रतिभा को अमेरिका में बनाए रखने के लिए द्विदलीय विधेयक पेश किया है। ‘कीप इनोवेटर्स इन अमेरिका एक्ट’ वैकल्पिक व्यावहारिक प्रशिक्षण (ओपीटी) कार्यक्रम को कानून में स्थायी रूप से शामिल करेगा। इससे भारत जैसे देशों के हजारों छात्रों को डिग्री के बाद काम जारी रखने का अवसर मिलेगा।

प्रतिनिधि सैम लिकार्डो, जे ओबरनोल्टे और राजा कृष्णमूर्ति ने यह विधेयक प्रस्तुत किया। यह इमीग्रेशन एंड नेशनिलिटी एक्ट में बदलाव लाएगा, ताकि छात्र अपने क्षेत्र में प्रशिक्षण और नौकरी की औपचारिक अनुमति पा सकें। तीन दशकों से ओपीटी नियमों पर टिका है, लेकिन अब इसे कानूनी सुरक्षा मिलेगी।
लिकार्डो ने चेतावनी दी कि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ प्रतिभाओं को चीन या भारत भेजना अमेरिका के लिए घाटे का सौदा होगा। ओबरनोल्टे ने कहा कि यह स्पष्टता लाएगा, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में जरूरी है।
ट्रंप प्रशासन के संकेतों के बाद चिंता बढ़ी थी कि ओपीटी खत्म हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय छात्रों ने 2024-25 में 42.9 अरब डॉलर का योगदान दिया। उद्योग, विश्वविद्यालय और समर्थक इसका स्वागत कर रहे हैं।
यूएस फॉर सक्सेस की जिल वेल्च ने कहा कि यह अमेरिका को प्रतिभा का केंद्र बनाए रखेगा। टेकनेट की लिंडा मोरे ने इसे नवाचार के लिए बुद्धिमान कदम बताया। एफडब्ल्यूडी.यूएस के टॉड सल्ट ने आर्थिक मजबूती पर जोर दिया।
2024-25 में 2.9 लाख से अधिक छात्रों ने ओपीटी लिया, ज्यादातर एसटीईएम में। भारत के छात्रों के लिए यह H-1B का सेतु है। कनाडा जैसे देश आकर्षक विकल्प दे रहे हैं।
यह विधेयक अमेरिका की आर्थिक, सुरक्षा और नवाचार क्षमता को मजबूत करेगा।
