
वॉशिंगटन में अमेरिकी कृषि विभाग ने अपनी व्यापारिक रणनीति को भारत और चीन जैसे विशाल बाजारों की ओर मोड़ दिया है। कृषि विभाग के अवर सचिव ल्यूक लिंडबर्ग ने सांसदों को बताया कि इससे देश के किसानों के लिए नए निर्यात द्वार खुलेंगे। हालांकि सुनवाई के दौरान टैरिफ, खाद्य सहायता और व्यापार घाटे पर गहन चर्चा हुई।
सांसदों ने आयात निर्भरता कम करने और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर सवाल उठाए। लिंडबर्ग ने माना कि समुद्री खाद्य में 75 प्रतिशत आयात पर निर्भरता है। उन्होंने कहा कि इस साल व्यापार घाटा 29 अरब डॉलर तक कम हो सकता है। घरेलू उत्पादन बढ़ाकर और निर्यात को गति देकर किसानों को लाभ मिलेगा।
‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के तहत तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति है- बेहतर सौदे, संबंध मजबूत करना और भागीदारों को जवाबदेह बनाना। एशिया में जापान, वियतनाम जैसे देशों में बाजार विस्तार हुआ। चीन ने 1.2 करोड़ मीट्रिक टन सोयाबीन खरीदा। भारत में पेकान पर ऊंचे टैरिफ के बावजूद बातचीत जारी है।
मध्य अमेरिका में ग्वाटेमाला का 5 करोड़ गैलन इथेनॉल खरीद का वादा और यूरोप में बीफ बाजार खुले। डेमोक्रेट्स ने टैरिफ की आलोचना की। फूड फॉर पीस कार्यक्रम के स्थानांतरण पर चिंता जताई गई, लेकिन यूएसडीए ने 452 मिलियन डॉलर की योजना बताई। यह नीति अमेरिकी कृषि को वैश्विक पटल पर मजबूत करेगी।