
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने न्यू स्टार्ट संधि के समाप्त होने को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए गंभीर संकट का प्रतीक बताया है। अमेरिका और रूस के बीच यह महत्वपूर्ण परमाणु नियंत्रण समझौता गुरुवार को खत्म हो गया, जिससे आधे सदी से अधिक समय बाद पहली बार इन महाशक्तियों के रणनीतिक हथियारों पर कोई कानूनी पाबंदी नहीं बची। ये दोनों देश विश्व के अधिकांश परमाणु भंडार के स्वामी हैं।
शीत युद्ध काल से चली आ रही ऐसी संधियों ने विश्व को आपदाओं से बचाया, गलतफहमियों को रोका और हजारों हथियारों को नष्ट करने में मदद की। गुटेरेस ने जोर देकर कहा कि रणनीतिक नियंत्रण ने सभी देशों की सुरक्षा मजबूत की, विशेषकर इन两国 की जनता के लिए।
समय सबसे अनुपयुक्त है, जब परमाणु युद्ध का डर दशकों में सर्वाधिक है। फिर भी, गुटेरेस ने आशा जताई कि यह नई शुरुआत का मौका है। दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बयानों का स्वागत करते हुए उन्होंने तत्काल वार्ता और जांच योग्य नई व्यवस्था की मांग की, जो जोखिम घटाए और सुरक्षा बढ़ाए।
2011 में बनी यह संधि आईएनएफ के बाद अंतिम प्रमुख समझौता थी। अब दुनिया उम्मीद करती है कि शब्दों से आगे बढ़कर ठोस कदम उठें, वरना अस्थिरता बढ़ेगी।