
जिनेवा में मानवाधिकार परिषद की शुरुआत के मौके पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दुनिया भर में मानवाधिकारों पर हो रहे हमलों को गहन चिंता का विषय बताया। सूडान, गाजा, यूक्रेन और म्यांमार जैसे क्षेत्रों में जारी युद्धों ने आम नागरिकों की जिंदगी को नर्क बना दिया है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन हो रहा है।
गुटेरेस ने कहा, “कानून का राज ताकत के राज से हार रहा है।” उन्होंने अधिकारों का रणनीतिक अपमान होने की बात कही, जो कई बार अहंकार से भरा होता है।
संयूक्त राष्ट्र खुद भी मुश्किलों से जूझ रहा है। फंडिंग कटौती से मानवाधिकार कार्यालय ‘जीवट मोड’ में है, विशेषज्ञों पर दबाव और अमेरिका जैसे देशों के अलगाव ने स्थिति बिगाड़ दी। जरूरतें बढ़ रही हैं, संसाधन घट रहे हैं।
मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर टर्क ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सत्ता और संसाधन की होड़ को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने संघर्ष समाप्ति की अपील का समर्थन किया और कहा कि सम्मान, समानता व न्याय में विश्वास अटल है।
स्वतंत्र देशों को धमकियां मिल रही हैं, बिना परिणामों की चिंता के। धन की कमी से कांगो और अफगानिस्तान की जांचें रुकी हुई हैं। गुटेरेस व टर्क ने सभी से अधिकारों की रक्षा की अपील की।