
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को खरीदने के पुराने विचार को फिर से ताजा करने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। वेनेजुएला के खिलाफ कदमों के बाद ट्रंप ने आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन की बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर ग्रीनलैंड को अमेरिकी सुरक्षा के लिए जरूरी बताया। इस पर डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने कड़ी चेतावनी दी, जबकि ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने उनका खुला समर्थन किया।
स्काई न्यूज से बातचीत में स्टार्मर ने कहा, ‘डेनमार्क हमारा करीबी यूरोपीय और नाटो सहयोगी है। ग्रीनलैंड का भविष्य सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क साम्राज्य का है।’ उन्होंने फ्रेडरिक्सन की स्थिति को सही ठहराते हुए कहा, ‘मैं उनके साथ हूं।’
डेनिश ब्रॉडकास्टर डीआर को दिए इंटरव्यू में फ्रेडरिक्सन ने ट्रंप की टिप्पणियों की निंदा की। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के बयानों को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने बार-बार अमेरिका का हिस्सा बनने से इनकार किया है। उन्होंने नाटो में किसी सदस्य के खिलाफ बल प्रयोग की आशंका जताई, जो सब कुछ रोक देगा।
ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि यूके डेनमार्क के साथ सुरक्षा परियोजनाओं में जुड़ा रहेगा। ग्रीनलैंड का फैसला ग्रीनलैंडवासियों और डेनमार्कियों का है।
ट्रंप का यह बयान 2019 के विवाद को याद दिलाता है। आर्कटिक में बदलते समीकरणों के बीच यूरोपीय नेता डेनमार्क के पक्ष में लामबंद हो रहे हैं, जो नाटो की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। यह घटना वैश्विक भू-राजनीति में संप्रभुता की अहमियत को रेखांकित करती है।