
अबू धाबी में सोमवार को आयोजित महत्वपूर्ण बैठक में संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने गाजा में चल रहे संघर्ष को हमेशा के लिए खत्म करने की आवश्यकता पर जोर दिया। दोनों नेताओं ने मध्य पूर्व में शाश्वत शांति के लिए दो-राष्ट्र समाधान को एकमात्र विकल्प बताया।
क्षेत्रीय तनाव के बीच हुई इस चर्चा में तत्काल स्थायी युद्धविराम और गाजा के नागरिकों तक बिना रुकावट सहायता पहुंचाने पर बल दिया गया। नेताओं ने किसी भी अतिरिक्त सैन्य कार्रवाई के खिलाफ कड़ी चेतावनी जारी की, कहा कि इससे पूरे क्षेत्र पर बुरा असर पड़ेगा।
मिस्र के राष्ट्रपति भवन के बयान के अनुसार, क्षेत्रीय स्थिरता अरब देशों की एकजुटता और अखंडता पर टिकी है। दोनों ने बहुआयामी संकटों के समाधान के लिए शांतिपूर्ण रास्तों को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता जताई।
बैठक में द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ। शेख मोहम्मद ने अल-सीसी को मोहम्मद बिन जायद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यूनिवर्सिटी का भ्रमण कराया, जो यूएई की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं का प्रतीक है।
यूएई मिस्र का प्रमुख निवेशक रहा है। 2024 में भूमध्य सागर तट के विकास के लिए 35 अरब डॉलर की बड़ी डील ने मिस्र की अर्थव्यवस्था को मजबूती दी।
इधर, मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती ने रविवार को ग्रीस के समकक्ष से फोन पर गाजा युद्धविराम की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय बल की मांग की। उन्होंने अमेरिकी शांति योजना के दूसरे चरण को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
अब्देलाती ने फिलिस्तीनी तकनीकी राष्ट्रीय समिति को मिस्र का समर्थन दोहराया, जो गाजा के दैनिक प्रशासन और मानवीय कार्यों के लिए संक्रमणकालीन संस्था है। जनवरी में बनी यह समिति फिलिस्तीनी प्राधिकरण की वापसी का रास्ता तैयार कर रही है।
10 अक्टूबर से चल रहे युद्धविराम में कैदी विनिमय और सहायता पर ध्यान है। अगले चरण में इजरायली सेना की वापसी, हमास का निरस्त्रीकरण और पुनर्निर्माण की योजना है।
यह बैठक क्षेत्रीय शांति और आर्थिक प्रगति की दिशा में सकारात्मक कदम है।