
पाकिस्तान के अशांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) ने समानांतर शासन की नींव रख दी है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कमजोरी का फायदा उठाते हुए टीटीपी ने खैबर जिले में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।
यहां टीटीपी के लड़ाके खुले आम तलाशी और नाके चला रहे हैं, जबकि स्थानीय पुलिस मजबूरन चुप्पी साधे हुए है। अफगान तालिबान और बलूच लिबरेशन आर्मी से जूझते पाकिस्तान की फौज के पास खैबर पर ध्यान देने की फुरसत ही नहीं बची।
बारा क्षेत्र में टीटीपी का दबदबा साफ दिख रहा है। संगठन लोगों से चंदा वसूल रहा है और सुरक्षा चौकियां गढ़ रहा है, ताकि पाकिस्तानी अधिकारियों का प्रवेश रोका जा सके। स्थानीय लोग केंद्र सरकार के रवैये से तंग आ चुके हैं, जिससे टीटीपी को खुला समर्थन तो नहीं, लेकिन विरोध भी कम मिल रहा है।
टीटीपी का लक्ष्य पूरे इलाके पर कब्जा जमाना है। वह वादा कर रहा है कि उसके राज में जल्द शांति बहाल हो जाएगी। दूसरी ओर, पाकिस्तान आइएसकेजेपी जैसे गुटों को टीटीपी के खिलाफ इस्तेमाल करने की फिराक में है।
ये ‘डेथ स्क्वॉड’ खैबर और बलूचिस्तान दोनों में सक्रिय होंगे। भारतीय खुफिया एजेंसियां मानती हैं कि स्थिति गंभीर है और बड़ा संघर्ष नजदीक है। पाकिस्तान की अफगानिस्तान के साथ उलझन ने केपी को असुरक्षित बना दिया है।
यह नया समीकरण न सिर्फ पाकिस्तान, बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।