
नई दिल्ली। 2026 की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला में सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलास मादुरो और उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर अमेरिका ले आए। यह कदम ट्रंप के रूस-यूक्रेन युद्ध एक दिन में खत्म करने और नोबेल शांति पुरस्कार पाने के दावों के ठीक विपरीत है।
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने विशेष बातचीत में कहा कि यूक्रेन में रूस ने ट्रंप का अच्छा साथ दिया, लेकिन ऐसा कोई समझौता संभव नहीं जो यूक्रेनियों को स्वीकार हो। ‘ट्रंप नोबेल चाहते हैं, पर दोनों पक्ष बहुत दूर हैं। वे डील से पीछे हट सकते हैं।’
वेनेजुएला पर बोल्टन ने कहा कि यह कार्रवाई रूस, चीन, ईरान और क्यूबा जैसे खतरों के खिलाफ संदेश है। मादुरो सरकार ने देश को इनके लिए बेस बनाया, जहां दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं। रूस इसे क्यूबा से ज्यादा सुरक्षित मानता है। क्यूबा सस्ते तेल पर टिका है। चीन 80 प्रतिशत तेल खरीदता है। ईरान का सबसे बड़ा दूतावास काराकास में है, हिज्बुल्लाह पर नजर रखने और यूरेनियम भंडार पर।
यह सब पश्चिमी गोलार्ध के लिए खतरा है। ट्रंप की यह जीत उनकी शांति छवि को प्रभावित कर सकती है। रूस-यूक्रेन में सुलह का रास्ता अब और कठिन हो गया लगता है।
