व्हाइट हाउस में सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में युद्ध अपराधों के आरोपों पर हैरान करने वाला जवाब दिया। जब पत्रकारों ने सीधे पूछा कि क्या उनकी कार्रवाइयां युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकती हैं, तो ट्रंप ने बिना पलक झपकाए कहा, ‘और क्या?’ यह बयान उस बहस के बीच आया जब वे अमेरिका की रणनीति का बचाव कर रहे थे।

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यह जंग ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए लड़ी जा रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमले बहुत बड़े पैमाने पर हैं। ‘हम एक देश को तबाह कर रहे हैं, और मुझे यह अच्छा नहीं लगता, लेकिन हम ऐसा कर ही रहे हैं।’ ईरान की सैन्य ताकत अब बुरी तरह चूर-चूर हो चुकी है। उनके पास केवल कुछ मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं, असल में लड़ने की कोई ताकत नहीं बाकी।
उन्होंने ओबामा के न्यूक्लियर समझौते से बाहर निकलने के अपने फैसले को इस संकट से जोड़ा। ‘अगर हम उस बराक हुसैन ओबामा के डील को नहीं तोड़ते, तो इजरायल मिट चुका होता।’ अगर ईरान अमेरिकी शर्तें मान ले, तो युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है।
नागरिकों पर प्रभाव और ईरान की आंतरिक स्थिति पर सवालों के जवाब में ट्रंप ने दावा किया कि ईरानी जनता इस संघर्ष को जारी रखना चाहती है। ‘जब बमों की गूंज बंद हो जाती है, वे बेचैन हो जाते हैं। वे आजादी चाहते हैं।’ उन्होंने वहां विरोध प्रदर्शनों को खूनी दमन का शिकार बताया, जहां सड़कों पर उतरने वालों को गोलियों से भून दिया जाता है।
यह बयान एक सार्वजनिक सभा में दिए गए, जहां ट्रंप ने युद्ध की रणनीति पर कई सवालों का सामना किया। उनका यह रुख संघर्ष को और तेज करने का संकेत देता है।
