
वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे राष्ट्रपति कार्यकाल की शुरुआत ने अमेरिका की विदेश नीति को नई गति दी है, जहां पहले साल में ही हवाई और ड्रोन हमलों की संख्या पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के पूरे चार साल के कार्यकाल से अधिक हो गई। आर्म्ड कॉन्फ्लिक्ट लोकेशन एंड इवेंट डेटा प्रोजेक्ट (एसीएलईडी) के आंकड़ों के अनुसार, 20 जनवरी 2025 से 5 जनवरी 2026 तक अमेरिका ने 573 स्वतंत्र हमले किए, जो सहयोगी बलों के साथ मिलाकर 658 हो गए। बाइडेन काल में यह संख्या क्रमशः 494 और 694 थी।
गैर-लाभकारी संगठन के विश्लेषण में सामने आया कि पिछले 12 महीनों में नौ देशों में 1,008 सैन्य घटनाओं में अमेरिका शामिल रहा, जिससे करीब 1,093 मौतें हुईं। बाइडेन कार्यकाल में कुल 1,648 घटनाएं और 1,518 मौतें दर्ज की गईं। कैरेबियन और प्रशांत क्षेत्र में 110 ड्रग तस्करों को मार गिराने जैसे अभियान उल्लेखनीय रहे, साथ ही ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमलों में हताहतों की संख्या अभी अस्पष्ट है।
2025 में 80 प्रतिशत से अधिक हमले यमन के हूती विद्रोहियों पर केंद्रित रहे, जहां 530 से ज्यादा मौतें हुईं। एसीएलईडी का कहना है कि यह ‘पहले हमला, फिर जांच’ की रणनीति को दर्शाता है, जो पूर्ववर्ती प्रशासनों की तुलना में तेज और बाधारहित है।
एसीएलईडी की सीईओ क्लियोनाड रैले ने चेतावनी दी कि अमेरिका की यह आक्रामकता न केवल गति में बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों को चुनौती देने में भी चौंकाने वाली है। वेनेजुएला, नाइजीरिया जैसे देशों में त्वरित कार्रवाइयां इसका प्रमाण हैं, जबकि ग्रीनलैंड, कोलंबिया और क्यूबा पर नजरें टिक सकती हैं, जिन्हें संसाधन-समृद्ध क्षेत्र के रूप में देखा जा रहा है।
ये आंकड़े अमेरिकी विदेश नीति में बड़ा परिवर्तन दर्शाते हैं, जो वैश्विक स्थिरता पर सवाल खड़े कर रहे हैं।