
केप टाउन, 17 जनवरी। भारत के 2026 में ब्रिक्स की कमान संभालने के साथ यह समूह फिर से सुर्खियों में है। बहुपक्षीय कूटनीति पर दबाव के इस दौर में एक रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अमेरिकी विदेश नीति वैश्विक दक्षिण के लिए खतरा बन रही है, जो नए साम्राज्यवादी युग की याद दिला रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 की शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने आक्रामक कदम उठाए। 3 जनवरी को अमेरिकी कमांडो ने कराकस में छापा मारा, वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को नार्को-आतंक के आरोप में पकड़ा। फिर वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर अमेरिकी निगरानी की घोषणा।
इससे पहले, 25 दिसंबर 2025 को नाइजीरिया के सोकोटो में आईएसआईएस ठिकानों पर हमले। इसे ईसाइयों की सुरक्षा बताया गया।
ग्रीनलैंड पर भी दावा। सुरक्षा, खनिज और आर्कटिक रास्तों का हवाला देकर डेनमार्क से टकराव। सैन्य विकल्प खुले।
दक्षिण अफ्रीकी थिंक टैंक के फापानो फाशा ने टी.के. अरुण के लेखों का जिक्र किया। ट्रंप की नीति 19वीं सदी के साम्राज्यवाद जैसी, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था को तोड़ रही है।
वेनेजुएला हस्तक्षेप तेल नियंत्रण में बदल गया। रूस तेल खरीदने वालों पर 500% टैरिफ की धमकी। वैश्विक दक्षिण ब्रिक्स जैसे मंचों की ओर। भारत की भूमिका अहम होगी।