
ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के खिलाफ भड़के प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर नई सैन्य कार्रवाई का दबाव बढ़ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, ट्रंप को तेहरान के खिलाफ हमलों के कई विकल्पों पर विस्तृत ब्रिफिंग दी गई है, जिसमें गैर-सैन्य लक्ष्यों पर प्रहार शामिल हैं।
28 दिसंबर से शुरू हुए आंदोलन राष्ट्रीय करेंसी के गिरावट से उपजी कीमतों के उछाल पर केंद्रित हैं। खाद्य पदार्थों और जरूरी वस्तुओं की महंगाई ने आम जन को सड़कों पर उतार दिया है। खामेनेई सरकार के खिलाफ नारों के साथ हिंसा भड़क उठी, जिसे दबाने के लिए गुरुवार को पूरे देश में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं ठप कर दी गईं। 60 घंटे बाद भी बहाली नहीं हुई।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर ईरान की आजादी की खोज का जिक्र कर अमेरिकी मदद की पेशकश की। पहले भी उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की सूरत में हमले की चेतावनी दी थी। अमेरिका खुले तौर पर विरोधियों का समर्थन कर रहा है।
विपक्ष में, ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाया। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर अमेरिका की आलोचना की। संसदीय स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कड़ा संदेश दिया कि अमेरिकी हमले की स्थिति में सेना, जहाजरानी केंद्र और कब्जे वाले इलाके निशाना बनेंगे।
आर्थिक संकट और सैन्य तनाव के इस माहौल में ट्रंप का फैसला मध्य पूर्व की भूराजनीति बदल सकता है। क्या यह केवल धमकी है या वास्तविक कार्रवाई? दुनिया बांहें ताने इंतजार कर रही है।
