
वाशिंगटन, 12 जनवरी। एयर फोर्स वन में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि ग्रीनलैंड अब अमेरिका के अधीन होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका इस रणनीतिक क्षेत्र पर कब्जा नहीं करेगा, तो रूस या चीन इसे हथिया लेंगे।
पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘अगर हम ग्रीनलैंड नहीं लेंगे, तो रूस या चीन ले लेंगे। मैं यह बर्दाश्त नहीं करूंगा।’ उन्होंने बातचीत से समाधान निकालने की इच्छा जताई, लेकिन जोर देकर कहा कि ग्रीनलैंड अमेरिका के पास आना ही है।
ट्रंप ने लीज या अस्थायी व्यवस्था को सिरे से खारिज कर दिया। उनका कहना था कि पूर्ण मालिकाना हक जरूरी है, जैसे रियल एस्टेट में डीड होता है। सैन्य कार्रवाई पर सवाल उठने पर उन्होंने कहा कि फोकस सिर्फ अधिग्रहण पर है।
ग्रीनलैंड की सुरक्षा व्यवस्था को उन्होंने नाममात्र का बताया, जहां रूसी और चीनी युद्धपोत घूम रहे हैं। अमेरिकी सेना की मौजूदगी पर्याप्त नहीं, मालिकाना हक चाहिए।
नाटो पर प्रभाव न पड़ने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ही इसे मजबूत किया है, जहां सदस्य अब जीडीपी का पांच फीसदी रक्षा पर खर्च कर रहे हैं।
डेनमार्क के अधीन स्वायत्त ग्रीनलैंड आर्कटिक में स्थित है, जो शिपिंग रूट्स और सैन्य कॉरिडोर के कारण महत्वपूर्ण है। रूस-चीन की बढ़ती सक्रियता चिंता का विषय बनी हुई है। अभी डेनमार्क को औपचारिक प्रस्ताव नहीं दिया गया, लेकिन ट्रंप ने ग्रीनलैंड को तैयार रहने को कहा। यह बयान आर्कटिक की भू-राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।