
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले सभी देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए सोमवार को बड़ा ऐलान किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान के साथ कारोबार करने वाले किसी भी देश को अमेरिका के साथ होने वाले सभी व्यापार पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क चुकाना होगा। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और इसे अंतिम माना जाएगा।
इस कदम से भारत जैसे देशों पर गहरा प्रभाव पड़ सकता है, जहां अमेरिकी निर्यात पर कुल शुल्क 75 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। भारतीय उद्योगपति और निर्यातक चिंतित हैं, क्योंकि इससे तेल आयात और अमेरिकी बाजार दोनों प्रभावित होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यापारिक संबंधों को नया मोड़ देगा।
उसी दिन व्हाइट हाउस ने ईरान के प्रति दोहरी नीति का जिक्र किया। प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति हिंसा रोकने और तेहरान के निजी संदेशों का मूल्यांकन करना चाहते हैं। ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच कूटनीति को प्राथमिकता दी जा रही है, लेकिन सैन्य विकल्प भी खुले रखे गए हैं।
लेविट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की पहली पसंद बातचीत है। विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ईरान वार्ता में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ईरान जानता है कि ट्रंप पहले भी कठोर निर्णय ले चुके हैं। परमाणु मुद्दे पर कोई सख्त शर्त नहीं बताई गई, लेकिन दबाव बनाए रखने का संकेत दिया।
ईरान में तनाव चरम पर है। ट्रंप का यह टैरिफ हथियार तेहरान को आर्थिक रूप से घेरने का प्रयास है। वैश्विक व्यापार पर इसके असर लंबे समय तक दिखेंगे, जबकि कूटनीतिक प्रयास जारी रहेंगे।