
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर हिंसक झड़पें तेज हो गई हैं, जिसमें अब तक कई लोग मारे जा चुके हैं। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संकट में अमेरिका के हस्तक्षेप से स्पष्ट मना कर दिया है। उन्होंने पाकिस्तान के आर्मी चीफ असिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की खुलेआम सराहना की, उन्हें महान नेता बताया।
मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘मैं दखल दे सकता हूं, लेकिन आपके पास शानदार पीएम और जनरल हैं। ये ऐसे लोग हैं जिनका मैं बहुत सम्मान करता हूं। पाकिस्तान बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है।’ उनका यह बयान तब आया जब पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अफगानिस्तान के खिलाफ जंग की चेतावनी दी थी।
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से भी पाकिस्तान के पक्ष में बयान आया। प्रवक्ता एलिसन एम. हूकर ने कहा कि तालिबान अपने आतंकवाद-रोधी वादों पर खरा नहीं उतर रहा, जिससे इलाका अस्थिर हो रहा है। अफगानिस्तान से आतंकी हमले हो रहे हैं, और पाकिस्तान को खुद बचाव का हक है।
यह रुख अमेरिका के अफगानिस्तान के साथ लंबे इतिहास को देखते हुए समझा जा सकता है। 9/11 हमलों के बाद अमेरिका ने 20 साल तक वहां सैन्य मौजूदगी रखी। अलकायदा के आतंकियों ने चार विमानों से अमेरिका पर हमला किया था, जिसमें करीब 3000 लोग मारे गए। तालिबान ने ओसामा बिन लादेन सौंपने से इंकार कर दिया था, जिसके बाद जॉर्ज बुश ने हमला किया। 2021 में सैनिक हटाए जाने पर तालिबान फिर सत्ता में आ गया।
ट्रंप का फैसला दर्शाता है कि अमेरिका अब मध्य पूर्व के विवादों से दूर रहना चाहता है। पाकिस्तान के नेताओं पर भरोसा जताते हुए ट्रंप ने क्षेत्रीय शक्तियों को खुद संभालने का संकेत दिया। सीमा पर तनाव बरकरार है, और अब देखना है कि पाकिस्तान इसे कैसे काबू करता है।