
न्यूयॉर्क, 3 मार्च। वैश्विक तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने विदेशी युद्धों से दूरी के अपने पुराने रुख से हटते हुए बड़ा बयान दिया है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि यदि जरूरी हुआ तो ईरान में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती से इंकार नहीं करेंगे। ‘हर राष्ट्रपति कहता है कि जमीन पर कोई सैनिक नहीं होंगे, मैं ऐसा नहीं कहता,’ उन्होंने स्पष्ट किया।
शनिवार सुबह शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने रफ्तार पकड़ ली है। ट्रंप ने खुलासा किया कि चार हफ्ते में खत्म होने वाला ईरान का नेतृत्व एक ही दिन में ध्वस्त हो गया। 49 प्रमुख नेता मारे गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई भी शामिल हैं। ‘यह तय समय से बहुत आगे चल रहा है और जल्द खत्म होगा,’ उन्होंने कहा।
हालांकि, सोमवार तक सेंट्रल कमांड ने बताया कि चार अमेरिकी सैनिक शहीद हो चुके हैं। ट्रंप ने शुरूआती वीडियो में चेतावनी दी थी, ‘ईरानी शासन मारना चाहता है। हमारे वीर सैनिक हताहत हो सकते हैं।’
ट्रंप को चार-पांच हफ्ते का समय लगने की उम्मीद है, लेकिन लंबा खिंचने पर भी तैयार हैं। संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के राजदूत डैनी डैनन ने कहा कि जितना समय लगे, लगेगा।
घरेलू स्तर पर जनमत सतर्क है। रॉयटर्स-आईपीएसओएस सर्वे में महज 27 प्रतिशत ने ईरान पर हमले का समर्थन किया, 43 प्रतिशत विरोध में। ट्रंप ने खारिज करते हुए कहा, ‘मुझे सर्वे की परवाह नहीं। सही काम करना है। लोग प्रभावित हैं।’ उन्होंने साइलेंट मेजॉरिटी पर भरोसा जताया।
ऑपरेशन की सफलता के बावजूद सैनिक तैनाती की बात जोखिम भरी है। दुनिया ट्रंप के अगले कदम देख रही है।