
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को हासिल करने की अपनी जिद को नया मोड़ दिया है। उन्होंने डेनमार्क का साथ देने वाले आठ यूरोपीय देशों पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाने का एलान किया है, जो 2026 में बढ़कर 25 प्रतिशत हो जाएगा। यह कदम तब तक जारी रहेगा जब तक ग्रीनलैंड की पूरी खरीद पर सौदा न हो जाए।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा कि अमेरिका दशकों से इन देशों को सब्सिडी देता आया है, लेकिन बदले में कुछ नहीं मिला। उन्होंने चीन और रूस के खतरे का हवाला देते हुए कहा कि डेनमार्क के पास सुरक्षा के लिए महज दो डॉगस्लेड हैं। ग्रीनलैंड को गोल्डन डोम और आधुनिक हथियार प्रणालियों के लिए जरूरी बताते हुए ट्रंप ने कहा कि केवल अमेरिका ही इस खेल को जीत सकता है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने एक्स पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने ग्रीनलैंड को डेनमार्क का हिस्सा बताया और आर्कटिक सुरक्षा को नाटो के लिए महत्वपूर्ण ठहराया। स्टारमर ने कहा कि सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाना गलत है और वे अमेरिका से सीधे बात करेंगे।
नीदरलैंड के विदेश मंत्री डेविड वैन वील ने भी टैरिफ की निंदा की। उन्होंने ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास को सुरक्षा के लिए जरूरी बताया और यूरोपीय संघ के साथ मिलकर जवाब देने की बात कही।
डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर लगने वाले इन टैरिफ से ट्रांसअटलांटिक संबंधों में तनाव बढ़ गया है। आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच ट्रंप का यह दांव नाटो की एकता को चुनौती दे रहा है। क्या यूरोप पीछे हटेगा या आर्थिक जवाब देगा? आने वाले दिन निर्णायक होंगे।