
वॉशिंगटन में इन दिनों ईरान के साथ संभावित टकराव की चर्चाएं जोरों पर हैं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सभी अटकलों पर पूर्ण विराम लगा दिया है। ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में उन्होंने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो ईरान के खिलाफ कोई सैन्य अभियान आसानी से जीता जा सकता है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने ट्रंप को लंबे सैन्य अभियान के जोखिमों से आगाह किया है। इनमें अमेरिका और सहयोगियों को नुकसान तथा ईरान की हवाई रक्षा की कमजोरियों का उल्लेख है। जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने इन चिंताओं को रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठकों में व्यक्त किया।
ट्रंप ने मीडिया की खबरों को ‘100 प्रतिशत गलत’ ठहराते हुए स्पष्ट किया कि केन युद्ध के खिलाफ हैं लेकिन जीत के प्रति आश्वस्त। उन्होंने ‘मिडनाइट हैमर’ ऑपरेशन का जिक्र किया, जिसमें केन के नेतृत्व में बी-2 बॉम्बर्स ने ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया।
कांग्रेस में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं। सीनेटर क्रिस कून्स ने ईरान के निकट अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के बड़े जमावड़े पर सवाल उठाए। उन्होंने मकसद, सैनिकों की सुरक्षा और संघर्ष समाप्ति पर जवाब मांगे। कून्स ने माना कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए, लेकिन हमलों से उसका मन नहीं बदलेगा।
प्रतिनिधि सेठ मौल्टन ने इसे ‘इराक युद्ध 2.0’ करार दिया। उन्होंने ट्रंप पर पुराना समझौता तोड़ने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से हस्तक्षेप की अपील की। ट्रंप का यह रुख मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल में महत्वपूर्ण है।