
अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने विश्वविद्यालयों को विदेशों से मिलने वाले फंड्स पर नजर रखने का अभियान तेज कर दिया है। नया सार्वजनिक पोर्टल लॉन्च कर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दावा किया गया है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगा बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग रोके।
शिक्षा और विदेश विभाग के अधिकारियों ने मिलकर यह प्लेटफॉर्म शुरू किया। अब विश्वविद्यालय सालाना 2.5 लाख डॉलर से ज्यादा के विदेशी उपहार या अनुबंध की जानकारी आसानी से दर्ज कर सकेंगे, और जनता भी इसे देख सकेगी।
हायर एजुकेशन एक्ट की धारा 117 के तहत 1986 से यह नियम है, लेकिन पालन में ढिलाई रही। 2025 में 5.2 अरब डॉलर, कुल 67 अरब डॉलर विदेशी फंड्स दर्ज। कतर 1.2 अरब, ब्रिटेन 630 मिलियन, चीन 530 मिलियन डॉलर के साथ शीर्ष पर। टाटा जैसे भारतीय समूह भी दायरे में।
अधिकारी इसे ‘प्रकाश डालना’ बता रहे, ताकि फंड्स के साथ छिपे प्रभाव का पता चले। एआई, सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में खतरे। सीनेट ने पहले ‘ब्लैक होल’ कहा था रिपोर्टिंग को। येल यूनिवर्सिटी ने चार साल छिपाया।
19 जांचों से अनुपालन बेहतर। भारत-अमेरिका सहयोग के लिए पारदर्शिता जरूरी। कोई प्रतिबंध नहीं, बस खुलासा अनिवार्य।