सूडान के खूनी गृहयुद्ध ने स्वास्थ्य सुविधाओं को सीधा निशाना बना लिया है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, 2023 से अब तक 214 हमलों में 2,042 लोग मारे गए और 785 घायल हुए। यह मानवीय त्रासदी की चरम स्थिति को दर्शाता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ ने संयुक्त बयान जारी कर चेतावनी दी कि इस साल के पहले तीन महीनों में ही 184 मौतें और 295 घायल हुए। लड़ाई प्रभावित क्षेत्रों में हमलों की तीव्रता बढ़ रही है, जो चिंताजनक है।
डब्ल्यूएचओ के सूडान प्रतिनिधि शिबल सहबानी ने कहा कि ये हमले तब पहुंच रोकते हैं जब जरूरत सबसे अधिक होती है। उन्होंने मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा की मांग की।
यूनिसेफ के शेल्डन येट ने अस्पतालों पर हमलों को बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन बताया। संकट के समय ये सेवाएं बच्चों के लिए जीवनरेखा हैं।
ये घटनाएं अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं, जो पहले से गंभीर संकट को और गहरा रही हैं। अप्रैल 2023 से सूडानी सेना व रैपिड सपोर्ट फोर्स के संघर्ष में हजारों मरे, लाखों विस्थापित।
इधर, गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र ने खार्तूम में मुख्यालय दोबारा खोला। यूएनडीपी की गतिविधियां शुरू हुईं, जो तीन साल ठप थीं। इससे सहायता प्रयासों को गति मिलेगी।
विदेश मंत्री मोही एल-दीन सलेम ने इसे सहयोग की नई शुरुआत व स्थिरता का संकेत बताया। यूएनडीपी के शू हाओलियांग ने मानवीय सहायता, क्षमता निर्माण व पुनर्निर्माण पर जोर दिया।
खार्तूम से बाहर स्थानांतरित यूएन अब चुनौतियों से जूझ रहा है, जैसे क्षतिग्रस्त इंफ्रास्ट्रक्चर। सूडान क्षेत्र का सबसे बड़ा संकट झेल रहा: विस्थापन, स्वास्थ्य-शिक्षा ह्रास, भुखमरी।
तीसरे साल में प्रवेशते युद्ध पर यूएन ने 2026 योजना घोषित की। 33.7 मिलियन लोगों को सहायता चाहिए, जो 2025 से 3.3 मिलियन अधिक है। सभी पक्षों से अपील: स्वास्थ्य केंद्र बचाएं, सहायता पहुंचाएं।
