
स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम की सड़कों पर 28 फरवरी 1986 की रात सामान्य रौनक थी। सिनेमा हॉल से निकलते लोग, हल्की ठंड – सब कुछ वैसा ही था। लेकिन अगले ही पल एक गोलीबारी ने सब बदल दिया। स्वीडन के प्रधानमंत्री ओलोफ पाल्मे, जो बिना किसी बॉडीगार्ड के अपनी पत्नी के साथ टहल रहे थे, जमीन पर लुड़क गए। सीने में लगी गोली ने उन्हें मौके पर ही खत्म कर दिया।
ग्रैंड सिनेमा से फिल्म देखकर लौटते हुए पाल्मे दंपति स्वावेगन स्ट्रीट पर पहुंचे। ओलोफ पाल्मे की यह आदत जगजाहिर थी – वे सुरक्षा के बिना घूमना पसंद करते थे। स्वीडन की लोकतांत्रिक परंपरा में यह स्वाभाविक माना जाता था। लेकिन उस रात एक अज्ञात हमलावर ने पीछे से दो गोलियां चलाईं। पत्नी लिस्बेथ घायल हुईं, लेकिन बच गईं।
ओलोफ पाल्मे दो बार स्वीडन के पीएम रहे – 1969-76 और 1982-86 तक। वैश्विक मंच पर वे आग उगलते थे। वियतनाम युद्ध में अमेरिका की खिंचाई, दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद के खिलाफ संघर्ष, परमाणु हथियारों पर रोक की मांग – इन मुद्दों ने उन्हें दुश्मन भी बनाए।
हत्या ने स्वीडन को हिलाकर रख दिया। शांतिप्रिय देश में ऐसी वारदात चौंकाने वाली थी। जांच 34 साल चली। क्रिस्टर पेटरसन को दोषी ठहराया गया, फिर बरी। 2020 में स्टिग एंगस्ट्रॉम को मुख्य संदिग्ध नामित किया गया – स्कैंडिया में काम करने वाला यह ग्राफिक डिजाइनर घटनास्थल पर था, बयान बदलता रहा। लेकिन 2000 में उसकी मौत हो चुकी थी। मामला बंद।
यह हत्याकांड स्वीडन की खुली संस्कृति पर सवाल खड़े कर गया। सुरक्षा बढ़ी, भरोसा डगमगाया। फिर भी पाल्मे का विरासत बरकरार है – साहसी नेतृत्व का प्रतीक।