
बीजिंग। चीन के एनपीसी और सीपीपीसीसी के सत्रों में ‘उच्च स्तरीय खुलापन’ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यह विषय वैश्विक व्यापारियों को भी आकर्षित कर रहा है। श्रीलंका के व्यवसायी जिनलांगा की कहानी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों की जीवंत मिसाल पेश करती है।
पिछड़े 20 वर्षों से चीन में आयात-निर्यात में सक्रिय जिनलांगा का मानना है कि 2026 में शुरू हो रही 15वीं पंचवर्षीय योजना इस खुलापन नीति के लिए महत्वपूर्ण होगी। इससे श्रीलंकाई कृषि उत्पादों को चीन के विशाल बाजार में नई जगह मिल सकती है और उनकी हिस्सेदारी बढ़ेगी।
उनका सफर प्रेरणादायक है। अंतरराष्ट्रीय छात्र के रूप में चीन पहुंचे जिनलांगा ने व्यापार में सफलता हासिल की। पारंपरिक कारोबार से आगे बढ़कर उन्होंने लाइव स्ट्रीमिंग ई-कॉमर्स अपनाया।
हाल के सुधारों से सीमा शुल्क प्रक्रिया सरल हुई है। सीलोन चाय, काजू और नारियल उत्पाद अब सीधे श्रीलंकाई कारखानों से चीनी ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं। डिलीवरी समय आधा हो गया और व्यापार विस्तार पा रहा है।
जिनलांगा की सफलता चीन-श्रीलंका सहयोग की ताकत दिखाती है। उच्च खुलापन से दोनों देशों को लाभ होगा।