
नई दिल्ली में 17 से 20 फरवरी तक आयोजित भारत एआई प्रभाव समिट 2026 ग्लोबल साउथ की पहली ऐसी वैश्विक बैठक साबित हुई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने इसमें हिस्सा लिया और जिम्मेदार तथा समावेशी एआई विकास पर बल दिया। उन्होंने मानव सेवा, सांस्कृतिक विविधता और वैश्विक साझेदारी को एआई का मूल मंत्र बताया।
समिट में राष्ट्राध्यक्ष, संयुक्त राष्ट्र अधिकारी, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और तकनीकी विशेषज्ञों ने ‘पीपल, प्लैनेट एंड प्रोग्रेस’ के सिद्धांतों के तहत एआई शासन पर गहन चर्चा की।
19 फरवरी को नेताओं के सत्र में संबोधन देते हुए दिसानायके ने कहा कि एआई को मानवता की भलाई के लिए काम करना चाहिए। सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करना, अधिकारों की रक्षा और सभी के लिए समान पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए। उन्होंने एआई को आर्थिक-सांस्कृतिक सहयोग का नया माध्यम बताया।
एआई के सांस्कृतिक आयामों पर प्रकाश डालते हुए राष्ट्रपति ने उभरती प्रणालियों से भाषाई विविधता बनाए रखने और साझा विरासत को प्रतिबिंबित करने की अपेक्षा की। तकनीकी प्रगति सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करे, नष्ट न करे।
उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग के चार आधारभूत स्तंभ सुझाए: सुलभ पहुंच, केंद्रीकृत भाषा डेटासेट, साझा मूल्यांकन प्रक्रिया, सुरक्षा उपकरण और सामूहिक क्षमता निर्माण।
श्रीलंका ने समिट घोषणापत्र का समर्थन कर नैतिक, पारदर्शी और जनोन्मुखी एआई के लिए वैश्विक साझेदारी की पुनर्पुष्टि की।
द्विपक्षीय वार्ताओं में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद, भूटान पीएम शेरिंग तोबगे, फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों, ब्राजील के लूला और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से चर्चाएं हुईं। इनमें व्यापार, निवेश, पर्यटन, एआई, संस्कृति, शिक्षा, स्वास्थ्य और दक्षिण-दक्षिण सहयोग जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
20 फरवरी को पीएम मोदी के साथ बैठक में दोनों ने द्विपक्षीय प्रगति की समीक्षा की और व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। चक्रवात दितवाह के बाद भारत की सहायता के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।
समिट में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने मानव पूंजी, समावेशी सशक्तिकरण, सुरक्षित एआई, नवाचार और आर्थिक विकास पर विचार मंथन किया। यह समिट एआई के भविष्य को मानव केंद्रित बनाने की दिशा में मील का पत्थर है।