
श्रीलंका में 2019 के ईस्टर संडे बम धमाकों की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। इन हमलों में 279 निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। अब पूर्व राज्य खुफिया सेवा प्रमुख सुरेश सैली को गिरफ्तार कर लिया गया है। राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने सभी दोषियों को सजा दिलाने का वचन दिया था, और यह कदम उसी दिशा में है।
गोटाबाया राजपक्षे के कार्यकाल में सैली को महत्वपूर्ण पद मिला था। उन पर आरोप है कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव प्रभावित करने के लिए धमाकों को अंजाम देने की छूट दी। सैली को एलटीटीई के खात्मे का श्रेय था, लेकिन अब उनकी गिरफ्तारी से राजनीतिक हंगामा मच गया है। एलटीटीई से जुड़े तनाव फिर भड़कने की आशंका जताई जा रही है।
भारतीय एजेंसियों की नजर भी इस मामले पर है। हमले का सरगना मोहम्मद जहरान हाशिम तमिलनाडु में बार-बार आता था। एनआईए की जांच से पता चला कि हाशिम ने दक्षिण भारत में कट्टरपंथी नेटवर्क बनाया, जिसमें कोयंबटूर मंदिर हमले का प्रयास भी शामिल है। जब्त 100 वीडियो में आधे हाशिम के हैं, जो आईएसआईएस से जुड़े थे।
हाशिम ने मलप्पुरम, कोयंबटूर, नागपट्टिनम जैसे इलाकों को निशाना बनाया। सैली से पूछताछ में भारत-श्रीलंका कनेक्शन उजागर हो सकता है। एनटीजे की गतिविधियां दक्षिण भारत पर असर डाल रही हैं। भारत और श्रीलंका एलटीटीई पुनरुत्थान रोकने के लिए एकजुट हैं। मोदी-दिसानायके के रिश्ते सुरक्षा सहयोग मजबूत कर रहे हैं।
पूर्व विदेश मंत्री अली साबरी ने घटनाक्रम को चिंताजनक बताया। यह जांच क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।