
सियोल। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग ने शुक्रवार को पूर्व जापानी प्रधानमंत्री तारो आसो के साथ बैठक में सियोल-टोक्यो संबंधों को मजबूत बनाने और परस्पर लाभ के अवसर तलाशने की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों देशों के बीच पड़ोसी होने के नाते साझा आंगन की बात करते हुए ली ने सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान करने का सुझाव दिया।
यह बैठक राष्ट्रपति ली की हालिया जापान यात्रा के ठीक बाद हुई, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची से द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर विस्तृत चर्चा की। नारा में हुई यह मुलाकात ली का जापान का दूसरा दौरा था और जून में सत्ता संभालने के बाद जापानी पीएम के साथ पांचवीं शिखर बैठक। इससे पूर्व अक्टूबर में ग्योंगजू में पहली वार्ता हुई थी।
मंगलवार की शिखर बैठक में दोनों नेताओं ने शटल कूटनीति अपनाने का फैसला किया, जिसमें नियमित यात्राओं से भविष्योन्मुखी सहयोग को गति मिलेगी। ली ने आसो से तत्कालीन बैठक को कोरियाई जनता के लिए सियोल-टोक्यो संबंधों में तेजी से सुधार का संकेत बताया।
आसो ने भी तीन माह से कम समय में दूसरी शिखर बैठक को महत्वपूर्ण ठहराया। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय परिस्थितियों में बदलाव के बीच निकट सहयोग दोनों देशों के हित में है। 14 जनवरी को जापान से लौटे ली ने ताकाइची के साथ कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण की प्रतिबद्धता दोहराई।
उत्तर-पूर्व एशिया में सियोल, टोक्यो और बीजिंग के त्रिपक्षीय सहयोग पर भी विचार-विमर्श हुआ। जापानी समुद्री खाद्य पदार्थों पर कोरिया के आयात प्रतिबंध जैसे संवेदनशील मुद्दे उठे, खासकर जब सियोल सीपीटीपीपी में शामिल होने की कोशिश कर रहा है। दोनों पक्षों ने कार्यस्तरीय वार्ताओं का मार्ग प्रशस्त किया।